निरंतर दूरदर्शी नेतृत्व

दृष्टि, कार्य और समर्पण के माध्यम से सेवा। अटूट संकल्प के साथ भारत का मार्गदर्शन।

दर्शन

एकता, अनुशासन और सेवा के माध्यम से ‘हिंदुत्व’ को प्रत्यक्ष आचरण में जीते हुए शाश्वत राष्ट्रीय चेतना का जागरण।

शाखा संरचना

प्रतिदिन शाखा के माध्यम से देश के लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करने वाले व्यक्तियों का निर्माण, जमीनी स्तर पर राष्ट्र-परिवर्तन का अभियान।

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"मैं स्वयंसेवकों को दूसरों की जाति जानने की परवाह किए बिना पूर्ण समानता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ते हुए देखकर आश्चर्यचकित हूं।"—पुणे शिविर में बाबासाहेब अम्बेडकर, मई 1939

Dr. Babasaheb Ambedkar

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर

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सिंदी बैठक: ऐतिहासिक पड़ाव

सिंदी बैठक: ऐतिहासिक पड़ाव

फरवरी 1939 के तीसरे सप्ताह में वर्धा जिले के सिंदी में संघ के शीर्ष नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। डॉ. हेडगेवार के जीवनकाल में यह उनकी अंतिम बड़ी बैठक थी। स्वतंत्रता की आहट महसूस की जा रही थी और द्वितीय विश्व युद्ध जैसे अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों ने इस आशा को और प्रबल कर दिया था। उस समय भारत पर शासन कर रहा इंग्लैंड शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों से जूझ रहा था और वैश्विक घटनाओं पर अपनी पकड़ खोता जा रहा था। इंग्लैंड की यह बिगड़ती स्थिति साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद के अंत के संकेत के रूप में देखी जा रही ..

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