भारतीय किसान संघ (बीकेएस)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
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वरिष्ठ संघ प्रचारक श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी द्वारा वर्ष 1978 में स्थापित भारतीय किसान संघ एक राष्ट्रीय दृष्टि वाला किसान संगठन है, जिसकी नींव पारंपरिक भारतीय मूल्यों पर टिकी है। “कृषिमित् कृषस्व” की भावना से प्रेरित भारतीय किसान संघ समाज में किसान की केंद्रीय भूमिका को सम्मान और संरक्षण प्रदान करता है। किसानों के प्रति यह भावना भारतभूमि में वैदिक काल से ही चली आ रही है।
 
कुछ ऐसे उद्घोषों के माध्यम से
 
“देश के हम भंडार भरेंगे, लेकिन कीमत पूरी लेंगे”
 
यह संगठन किसानों के सम्मान और उनके उचित मूल्य के अधिकार पर जोर देता है। भारतीय किसान संघ आधुनिक कृषि सुधारों और पारंपरिक देशज पद्धतियों के बीच संतुलन बनाए रखता है। यह स्थानीय फसलों, जैविक खेती और टिकाऊ तकनीकों को बढ़ावा देकर ऐसी आत्मनिर्भर कृषि का समर्थन करता है, जो वैश्विक बाज़ारों पर निर्भर न हो। किसान संघ आर्थिक नियोजन में केंद्रीयकरण का विरोध करता है और भूमि, जल और बाज़ारों पर समाज के नियंत्रण पर जोर देता है।
 
किसान संघ ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, ऋण माफी और अन्यायपूर्ण भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर अनेक आंदोलन चलाये हैं। यह उचित दाम, बिचौलियों से कानूनी सुरक्षा और ग्रामीण ऋण सुधारों की पैरवी करता है। किसान संघ के लिए कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक स्तंभ है।
 
यह संगठन राष्ट्र-प्रथम की भावना में विश्वास करता है और किसान को भारत की सभ्यतागत विरासत का संरक्षक मानता है। कृषि प्रगति को राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव से जोड़कर किसान संघ भारत के ग्रामीण पुनर्जागरण की एक सशक्त प्रेरक शक्ति बना हुआ है।