12 जनवरी, 1963 को स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन स्थापित भारत विकास परिषद (बीवीपी) एक सेवा और मूल्य-उन्मुख सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जो देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता पर आधारित है।1962 के चीनी आक्रमण के उत्तर में उभरा यह संगठन डॉ. सूरज प्रकाश द्वारा कल्पित और न्यायमूर्ति बी.पी. सिन्हा तथा लाला हंसराज गुप्ता जैसे प्रमुख व्यक्तियों के सहयोग से आगे बढ़ा। बीवीपी का उद्देश्य सांस्कृतिक, शैक्षणिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में समग्र विकास को बढ़ावा देते हुए स्वस्थ–समर्थ–संस्कारित भारत का निर्माण करना है, यानी शरीर, अर्थव्यवस्था और चरित्र में मजबूत भारत।
पाँच सूत्र—सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण के आधार पर भारत विकास परिषद ने सेवा को महज दान से ऊपर उठाकर भारतीय परंपराओं के अनुरूप एक पवित्र कर्तव्य बनाने का यशस्वी प्रयास किया है। बीवीपी लाभार्थियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है और सुनिश्चित करता है कि वे समाज में सम्मानजनक तरीके से जुड़ सकें।
इसके माध्यम से संपूर्ण भारत में 1,600 से अधिक सक्रिय और स्थायी परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनमें मेडिकल सेंटर, ब्लड बैंक, प्रशिक्षण संस्थान, शैक्षणिक और वरिष्ठ नागरिक कल्याण सुविधाएँ शामिल हैं। सार्वजनिक धन से कोई प्रशासनिक खर्च न करते हुए, बीवीपी का मॉडल पूर्णतः सदस्यों की भागीदारी और पूर्ण पारदर्शिता पर आधारित है। यह परंपरा को कर्म से जोड़ता है, जिससे हर सेवा-कार्य में मूल्यों, कर्तव्य और राष्ट्र-प्रथम की भावना स्पष्ट झलकती है।