भारतीय मज़दूर संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
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23 जुलाई, 1955 को स्थापित भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है, जिसकी नींव राष्ट्रीय आदर्शों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर रखी गई। वैचारिक मतभेदों से उत्पन्न और राजनीतिक दलों से संबद्ध श्रमिक संगठनों के विपरीत, भारतीय मजदूर संघ एक स्वतंत्र और गैर-राजनीतिक पहल के रूप में उभरा, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय हितों के अनुरूप मजदूरों के कल्याण को आगे बढ़ाना है।
 
मार्क्सवादी वर्ग-संघर्ष की अवधारणा को नकारते हुए, भारतीय मजदूर संघ 'एकात्म मानव दर्शन' के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ टकराव नहीं, समन्वय और सहयोग को महत्त्व दिया जाता है। यह विचारधारा राष्ट्रीय विकास के साझा लक्ष्य के लिए श्रमिक और प्रबंधन दोनों को एकजुट करने का आग्रह करती है। इसके नारे “देश का औद्योगिकीकरण, उद्योग का श्रमिकीकरण और श्रमिकों का राष्ट्रीयकरण” तथा “श्रमिको, विश्व को एक करो” - साम्यवादी वर्ग-आधारित संघर्ष के स्थान पर एक सांस्कृतिक, समावेशी और राष्ट्र केंद्रित वैचारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
 
 
एक और उद्घोष है
"देश के हित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम"
 
यह नारा भारतीय मजदूर संघ की राष्ट्रीय दृष्टि को और मजबूत करता है। भारतीय मजदूर संघ शोषण के विरुद्ध संघर्ष करता है, किंतु वैमनस्य के बगैर। क्योंकि उसके अनुसार राष्ट्र–निर्माण में श्रमिक और उद्योग दोनों की समान जिम्मेदारी है। देश के सभी प्रमुख क्षेत्रों में एक करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ भारतीय मजदूर संघ समग्र विकास को बढ़ावा देता है, जिसमें स्वरोज़गार, सामाजिक सुरक्षा और शासन में श्रमिकों की आवाज़ को बुलंद करने के लिए ‘कार्यात्मक प्रतिनिधित्व’ जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं। पूरी तरह गैर–राजनीतिक रहते हुए इस श्रमिक संगठन का मानना है कि श्रमिकों को राजनीति की सेवा नहीं, बल्कि उसकी दिशा तय करनी चाहिए। अपनी सकारात्मक, सांस्कृतिक रूप से जुड़ी कार्य–दृष्टि के साथ मजदूर संघ आज भारत की श्रम नीति को दिशा देने और एक न्यायपूर्ण, उत्पादक और एकजुट राष्ट्रीय कार्यबल के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।