शारीरिक शिक्षा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
शारीरिक शक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद से ही इसका एक अभिन्न अंग रही है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित संघ ने हमेशा शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य पर जोर दिया है। डॉ. हेडगेवार अपनी युवावस्था में क्रांतिकारी समूहों से गहराई से प्रभावित थे। उनका मानना था कि मजबूत और स्वस्थ नागरिक देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं। संघ इसी दर्शन से आगे बढ़ा है। इसीलिये शारीरिक व्यायाम दैनिक गतिविधियों का एक प्रमुख घटक है। संघ शाखाओं के एक नेटवर्क के माध्यम से काम करता है, जहां शारीरिक स्वास्थ्य केंद्रीय भूमिका निभाता है। शुरू में कई युवा खेल और शारीरिक गतिविधियों के आकर्षण से शाखाओं की ओर आकर्षित होते हैं। ये शारीरिक अभ्यास न केवल शक्ति का निर्माण करते हैं, बल्कि अनुशासन और एकता स्थापित करने के साधन के रूप में भी काम करते हैं।
 
शाखाओं में बच्चे और वयस्क दोनों विभिन्न शारीरिक अभ्यासों और खेलों में भाग लेते हैं, जिससे उन्हें रचनात्मक तरीकों से अपनी ऊर्जा का उपयोग करने में मदद मिलती है। संघ के भीतर शारीरिक प्रशिक्षण को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया हैः अनुशासित शारीरिक अभ्यास और पारंपरिक खेल गतिविधियाँ। पहले वाले को 'समता' के रूप में जाना जाता है। उसमें ऐसे अभ्यास शामिल हैं जो प्रतिभागियों को पथ संचलन और अन्य शारीरिक कार्यों के लिए तैयार करते हैं। प्रशिक्षण का यह रूप अनुशासन, ध्यान और शारीरिक सहनशक्ति की भावना पैदा करता है। अभ्यास के अलावा, संघ कबड्डी, खो-खो और दंडगोल जैसे स्वदेशी खेलों के साथ-साथ सूर्य नमस्कार जैसे पारंपरिक अभ्यासों के महत्व पर भी जोर देता है।
 
इन गतिविधियों का चयन केवल शारीरिक लाभों के लिए नहीं, बल्कि उन मूल्यों के लिए भी किया जाता है, जिन्हें वे पोषित करती हैं। जैसे टीमवर्क, समानता और आत्म-अनुशासन। इन खेलों और अभ्यासों का उद्देश्य भाईचारा, सामूहिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत विकास जैसे गुणों का संवर्धन करना है। संघ का मानना है कि शारीरिक व्यायाम केवल बल निर्माण का साधन नहीं, बल्कि भावनात्मक और बौद्धिक संतुलन को भी प्रोत्साहित करता है। नियमित शारीरिक गतिविधियों में भागीदारी स्वयंसेवकों को ऐसे गुण विकसित करने में मदद करती है, जो व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक उत्तरदायित्व दोनों के लिए आवश्यक हैं। इनमें विनम्रता, संयम और आत्मसंयम जैसे मूल्य सम्मिलित हैं, जो किसी भी व्यक्ति के समग्र विकास में आधारभूत भूमिका निभाते हैं।
 
संघ समय-समय पर आयोजित शिविरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक प्रशिक्षण को खासतौर से प्रोत्साहित करता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना और उनका पोषण करना है, जिनमें शारीरिक व्यायाम की विशेष योग्यता हो, ताकि स्वास्थ्य और सशक्त जीवनशैली के प्रति संघ की प्रतिबद्धता और मजबूत हो सके। अंततः, संघ की गतिविधियों का शारीरिक पक्ष मात्र व्यायाम तक सीमित नहीं है। यह अनुशासित, संतुलित और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण का मार्ग है। ऐसे नागरिक, जो उन मूल्यों को जीते हैं, जो शारीरिक क्षेत्र से आगे बढ़कर भावनात्मक और बौद्धिक आयामों तक पहुँचते हैं।