प्रो.राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
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 Rajendra Singh
चौथे सरसंघचालक (1922-2003)
 
एक विद्वान। एक सेवक-मार्गदर्शक। विचार और कर्म के मध्य सेतु।
 
वर्ष 1922 में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में जन्मे श्री रज्जू भैया एक उत्कृष्ट भौतिक विज्ञानी थे। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के अध्यक्ष रहे। लेकिन अकादमिक प्रसिद्धि के बजाय उन्होंने राष्ट्रसेवा का पथ चुना।
 
युवावस्था में ही संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी विनम्रता, सत्यनिष्ठा और दूरदर्शी नेतृत्व से सम्मान अर्जित किया। साथ ही, उन्होंने एक समृद्ध शैक्षणिक जीवन और संघ के प्रति अथक परिश्रम को सहजता से संतुलित किया।
 
चौथे सरसंघचालक के रूप में श्री रज्जू भैया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सामाजिक जुड़ाव और राष्ट्र-निर्माण के दौर में आगे बढ़ाया और पूरे भारत में इसके प्रभाव का विस्तार किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए स्वयंसेवकों को हृदय और बुद्धि दोनों के साथ सेवा के लिए प्रेरित किया।
 
रज्जू भैया का जीवन इस बात का प्रेरणादायी उदाहरण है कि:
आप एक विचारक और कर्मयोगी दोनों हो सकते हैं।
 
आप आधुनिक प्रगति को आगे बढ़ाते हुए परंपरा का सम्मान कर सकते हैं।
सच्चा नेतृत्व सदैव नि:स्वार्थ सेवा से आरंभ होता है।
 
गहन किंतु सरल, रज्जू भैया का जीवन-पथ हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक परिवर्तन भीतर से उपजता है और फिर समाज की सेवा के माध्यम से दूर-दूर तक फैलता है।
 
यही हमारा मार्ग है — एषः पन्थाः।