प्रतिज्ञा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
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प्रतिज्ञा किसी भी नए स्वयंसेवक के संघ से जुड़ाव की एक गंभीर और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह प्रतिज्ञा सामान्यतः शाखा के वरिष्ठ पदाधिकारियों में से किसी एक द्वारा दिलाई जाती है। यदि प्रतिज्ञा सामूहिक रूप से ली जाती है तो संघ का कोई वरिष्ठ कार्यकर्ता उस अवसर पर प्रतिज्ञा लेने वाले स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर सकता है। व्यक्तिगत रूप से ली जाने वाली प्रतिज्ञा स्थानीय शाखा के पदाधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न होती है।
 
किसी भी स्वयंसेवक पर प्रतिज्ञा लेने का दबाव नहीं डाला जाता। क्योंकि यह पूरी तरह स्वेच्छा से ली जाने वाली प्रतिज्ञा है। जब स्वयंसेवक संघ के कार्य की महत्ता को समझते हैं तो वे स्वेच्छा से संकल्प लेने के लिए आगे आते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि संघ के करोड़ों स्वयंसेवक ऐसे रहे हैं, जिन्होंने जीवनभर के लिए यह संकल्प लिया और निरंतर संघ के कार्य में लगे रहे।
 
प्रतिज्ञा लेने वाले स्वयंसेवक को 'प्रतिज्ञित स्वयंसेवक' कहा जाता है। स्वयंसेवकों के जीवन में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है क्योंकि संघ में न तो आवेदन पत्र भरने की कोई औपचारिकता होती है और न ही यहाँ प्रवेश शुल्क देना पड़ता है। संगठन में प्रवेश का वास्तविक प्रतीक यही प्रतिज्ञा है, जिसे अधिकारी स्वयंसेवकों को दिलाते हैं।
 
प्रतिज्ञा इस प्रकार है :
"सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर तथा अपने पूर्वजों का स्मरण कर मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि अपने पवित्र हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति तथा हिंदू समाज का संरक्षण कर हिंदू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने के लिए मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घटक बना हूँ। संघ का कार्य मैं प्रमाणिकता से, निःस्वार्थ बुद्धि से तथा तन, मन, धन पूर्वक करूंगा और इस व्रत का मैं आजन्म पालन करूंगा।"
 
।। भारत माता की जय।।
प्रतिज्ञा ईश्वर के नाम पर और भगवा ध्वज के समक्ष की जाती है। इसमें विशेष रूप से स्वयंसेवकों की इस प्रतिबद्धता पर बल दिया जाता है कि वे हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति और हिंदू समाज का संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करेंगे तथा हिंदू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति हेतु समर्पित रहेंगे।
 
यह प्रतिज्ञा सभी क्षेत्रीय भाषाओं में ली जा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर इसका अंग्रेज़ी संस्करण भी प्रयोग किया जाता है। स्वतंत्रता-पूर्व (1947) की प्रतिज्ञा में राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रयासों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। 1947 में स्वतंत्रता के पश्चात प्रतिज्ञा में आवश्यक परिवर्तन किए गए।