हिंदुत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ    30-Sep-2026
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हिंदुत्व स्वभाव से ही सकारात्मक और रचनात्मक है। इसके मनोवैज्ञानिक पहलू के कारण इसे 'हिंदू-पन' भी कहा जा सकता है। हिंदूवाद तथा हिंदुत्व या हिंदू-पन के बीच बुनियादी अंतर है। 'वाद' एक बंद पुस्तक की भाँति होता है, जो अंतिम और सीमित होता है, जबकि हिंदुत्व एक जीवंत और गतिशील धारा है। हिंदुत्व एक खुली पुस्तक के समान है, जो सत्य की सतत खोज का प्रतीक है। यह कभी स्थिर नहीं रहता, बल्कि एक निरंतर गतिशील प्रक्रिया है। अपनी विशिष्ट मूलभूत विशेषताओं के कारण यह शाश्वत बना रहा है और सहस्राब्दियों से समय की कसौटी पर खरा उतरते हुए आज भी प्रासंगिक एवं जीवंत है।
 
हिंदुत्व कोई संकीर्ण अवधारणा नहीं, बल्कि अत्यंत व्यापक, गहन, समावेशी और अनुभव-आधारित जीवनदृष्टि है। इन्हीं मूलभूत विशेषताओं के कारण यह युगों-युगों से जीवंत और स्थायी बना हुआ है। हिंदुत्व में आस्तिकता और नास्तिकता, दोनों के लिए स्थान है; साथ ही यह अध्यात्मवाद और भौतिकवाद, दोनों को समाहित करने की क्षमता रखता है। हिंदुत्व सभी प्रकार के विचारों और चिंतन-धाराओं को स्थान देता है, जिसके लिए सहिष्णुता, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण और पर्याप्त साहस की आवश्यकता होती है। दूसरे शब्दों में, हिंदुत्व 'एकता में विविधता' नहीं, बल्कि 'विविधता में एकता' का स्वरूप है। यह सत्य की अनेक रूपों में अभिव्यक्ति है। हिंदुत्व का कोई पूर्ण विराम नहीं है, क्योंकि यह निरंतर प्रवाहमान और सतत विकासशील प्रक्रिया है।
 
हिंदुत्व न तो मात्र कोई अनुष्ठान है, न जीवन-शैली और न ही कोई विशिष्ट परंपरा। धर्म एक अत्यंत व्यापक अवधारणा है, जिसे अंग्रेज़ी में अक्सर रिलिजन कहा जाता है। धर्म का सटीक पर्याय अंग्रेज़ी में उपलब्ध नहीं है। धर्म वह शाश्वत व्यवस्था है, जिसमें समाज को धारण और संचालित करने वाले सनातन मानदंड समाहित होते हैं।
 
‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द की उत्पत्ति विदेश में हुई। हालाँकि उसका मूल भाव भारत के लिए अपरिचित नहीं है, क्योंकि यह भावना पीढ़ियों से इस राष्ट्र की परंपरा का हिस्सा रही है। भारतीय संविधान के मूल प्रारूप में धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं था। इसे बाद में सम्मिलित किया गया। इसका कारण यह था कि संविधान सभा का विश्वास था कि भारतीय मानस स्वभावतः सहिष्णु और उदार है। हिंदुत्व भारतीय मूल्य व्यवस्था का सजीव प्रतिबिंब है। इसलिए यह स्वतः राष्ट्रीय पहचान के साथ तादात्म्य स्थापित करता है। हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की भावना को पोषित करता है।